जागरूकता

गोंडा पुलिस अधीक्षक ने “निक्षय मित्र योजना” के तहत टीबी मरीजों को अपनाया, पोषण पोटली वितरित

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स्वदेश प्रेम ,ब्यूरो ,गोंडा, उत्तर प्रदेश

रमज़ान अली

गोंडा। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत सरकार द्वारा चलाई जा रही “निक्षय मित्र योजना” के अंतर्गत पुलिस अधीक्षक गोंडा श्री विनीत जायसवाल ने टीबी (क्षय) रोगियों की सहायता के लिए एक सराहनीय पहल की। 21 मार्च 2025 को पुलिस सभागार में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने टीबी मरीजों को पोषण पोटली वितरित की और दो टीबी रोगियों को गोद लिया।

पुलिस अधिकारियों ने भी लिया संकल्प

इस अवसर पर अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी) श्री मनोज कुमार रावत और अपर पुलिस अधीक्षक (पश्चिमी) श्री राधेश्याम राय ने भी एक-एक टीबी रोगी को गोद लिया। इसी तरह, समस्त क्षेत्राधिकारियों और थानाध्यक्षों ने भी इस पहल में योगदान देते हुए एक-एक टीबी रोगी को गोद लिया।

क्या है निक्षय मित्र योजना?

कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधीक्षक श्री विनीत जायसवाल ने बताया कि “निक्षय मित्र योजना” सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके तहत टीबी रोगियों को पोषण, निदान और व्यावसायिक सहायता प्रदान कर उन्हें स्वस्थ बनाने का प्रयास किया जाता है। इस योजना के अंतर्गत कोई भी नागरिक, जनप्रतिनिधि, राजनीतिक दल, गैर-सरकारी संगठन या कॉर्पोरेट संस्थान टीबी रोगियों को गोद लेकर उनकी मदद कर सकता है।

सरकार इस योजना के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देकर टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने का प्रयास कर रही है।

“टीबी हारेगा, देश जीतेगा” का लिया संकल्प

इस अवसर पर उपस्थित पुलिस अधिकारियों, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने “टीबी हारेगा, देश जीतेगा” के संकल्प को दोहराया और समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में मौजूद अधिकारी

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल, अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी) मनोज कुमार रावत, अपर पुलिस अधीक्षक (पश्चिमी) राधेश्याम राय, क्षेत्राधिकारी नगर आनन्द कुमार राय, क्षेत्राधिकारी सदर सुश्री शिल्पा वर्मा समेत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

सामाजिक भागीदारी से बनेगा टीबी मुक्त भारत

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सामाजिक सहयोग के माध्यम से टीबी रोगियों को हर संभव सहायता प्रदान करना और उन्हें इस बीमारी से मुक्त करना है। गोंडा पुलिस की इस पहल से निश्चित रूप से अन्य संगठनों और नागरिकों को भी प्रेरणा मिलेगी और टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को जल्द से जल्द हासिल किया जा सकेगा।

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