दिल्ली

शिक्षा, साहित्य और कला की प्रेरणादायक पहचान — शालिनी गौतम

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स्वदेश प्रेम / शान मोहम्मद सिद्दीकी

स्वदेश प्रेम राष्ट्रीय हिन्दी समाचार पत्र की ओर से संपादक शान मोहम्मद सिद्दीकी ने बहुमुखी प्रतिभा की धनी शिक्षिका, लेखिका एवं कला प्रेमी शालिनी गौतम से विशेष बातचीत की। शिक्षा, साहित्य और कला के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुकीं शालिनी गौतम न केवल एक समर्पित शिक्षिका हैं, बल्कि लेखन, डांस, क्राफ्ट, कुकिंग और ड्रेस डिजाइनिंग जैसी कई कलाओं में भी निपुण हैं।

उनकी रचनाएँ समाज की संवेदनाओं, संघर्षों और महिलाओं के मनोभावों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करती हैं। मातृभारती मंच पर प्रकाशित उनकी चर्चित रचनाएँ — “माँ को कौन समझता है…”, “मैं ही क्यों…”, “हमारा क्या… ना मायका ना ससुराल” तथा “जिन्दादिली से जिन्दा लाश तक का सफर…” — पाठकों के बीच काफी सराही गई हैं।

बातचीत के दौरान शालिनी गौतम ने बताया कि उन्हें परिवार और गुरुजनों से हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। उनका मानना है कि हर व्यक्ति के भीतर कोई न कोई प्रतिभा अवश्य होती है, जिसे सही दिशा और मेहनत के माध्यम से निखारा जा सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और कला समाज को सकारात्मक दिशा देने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं।

एक साथ कई जिम्मेदारियों को निभाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जब इंसान अपने कार्य को दिल से करता है, तो हर जिम्मेदारी आसान लगने लगती है। उनके अनुसार शिक्षा समाज को सही दिशा देने का माध्यम है, जबकि लेखन और कला विचारों को लोगों तक पहुँचाने का सशक्त जरिया हैं।

बच्चों के जीवन में कला और रचनात्मक गतिविधियों के महत्व पर उन्होंने कहा कि डांस, क्राफ्ट और अन्य रचनात्मक गतिविधियाँ बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इससे बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन, संस्कार और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित होती है।

लेखन के विषय में शालिनी गौतम ने कहा कि लेखन उनके लिए समाज में जागरूकता फैलाने और सकारात्मक सोच का संदेश देने का माध्यम है। वे अपनी रचनाओं के जरिए महिला सम्मान, शिक्षा और सामाजिक संवेदनशीलता जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाती हैं।

आज की युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया का उपयोग केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे सीखने और आगे बढ़ने के लिए भी इस्तेमाल करना चाहिए। युवाओं को अपनी प्रतिभा पहचानकर समय का सही उपयोग करना चाहिए, क्योंकि मेहनत और सकारात्मक सोच ही सफलता की कुंजी है।

उन्होंने यह भी कहा कि डांस, क्राफ्ट, कुकिंग और ड्रेस डिजाइनिंग जैसी कलाएँ आत्मनिर्भरता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, विशेष रूप से महिलाओं के लिए। उनके अनुसार हर महिला को अपनी प्रतिभा को पहचानकर आगे बढ़ना चाहिए, ताकि वह समाज में अपनी अलग पहचान बना सके।

समाज में महिलाओं की भूमिका पर उन्होंने कहा कि महिलाएँ समाज की शक्ति हैं और एक शिक्षित महिला पूरे परिवार को सही दिशा दे सकती है। आज महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं और उन्हें आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को पूरा करना चाहिए।

एक अच्छे शिक्षक की जिम्मेदारी पर उन्होंने कहा कि शिक्षक का कार्य केवल किताबों तक सीमित नहीं होता, बल्कि बच्चों को संस्कार, अनुशासन और नैतिकता की शिक्षा देना भी उतना ही जरूरी है। शिक्षक ही समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है।

अंत में शालिनी गौतम ने देशवासियों और युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानें और उसे सकारात्मक दिशा दें। उन्होंने कहा कि शिक्षा, कला और संस्कार मिलकर ही एक बेहतर, जागरूक और संवेदनशील समाज का निर्माण कर सकते हैं।

स्वदेश प्रेम राष्ट्रीय हिन्दी समाचार पत्र की ओर से शालिनी गौतम को उज्ज्वल भविष्य की हार्दिक शुभकामनाएँ। उनकी लेखनी, शिक्षा के प्रति समर्पण और बहुमुखी प्रतिभा समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।

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