देश

शिक्षा में असमानता और सरकारी स्कूलों की स्थिति

शेयर करें:
Spread the love

स्वदेश प्रेम / मोहद आरिश

शिक्षा किसी भी देश की प्रगति की नींव होती है, लेकिन भारत में आज भी शिक्षा में असमानता एक बड़ी चुनौती है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के स्कूलों के बीच सुविधाओं और गुणवत्ता का अंतर साफ दिखाई देता है। कई सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, जर्जर भवन, शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।

ग्रामीण इलाकों में बच्चों को स्कूल तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे ड्रॉपआउट की समस्या बढ़ती है। आर्थिक मजबूरी, बाल श्रम और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण भी बच्चे पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। वहीं शहरी क्षेत्रों में निजी स्कूलों की भरमार है, जहां महंगी फीस गरीब परिवारों की पहुंच से बाहर होती है।

सरकार द्वारा मिड-डे मील, मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म और छात्रवृत्ति जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन इनके क्रियान्वयन में कई जगह खामियां देखने को मिलती हैं। यदि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता, डिजिटल सुविधाएं और शिक्षक प्रशिक्षण पर ध्यान दिया जाए, तो शिक्षा में समानता लाई जा सकती है।

शिक्षा में निवेश देश के भविष्य म

आगे क्या पढ़ें AI

अपनी राय रखें