‘बुनकारी’ की कहानियाँ संवेदनाओं और समय की सशक्त अभिव्यक्ति : डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’
कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में सजा साहित्य का उत्सव, भावना शर्मा के यू-ट्यूब चैनल ‘आरम्भव’ का भी हुआ शुभारंभ
स्वदेश प्रेम / शान मोहम्मद सिद्दीकी
09 जून 2026
नई दिल्ली। आरम्भव के तत्त्वावधान में कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ़ इण्डिया के डिप्टी स्पीकर हॉल में कहानीकार व मातृभाषा उन्नयन संस्थान की राष्ट्रीय सचिव भावना शर्मा के कहानी संग्रह ‘बुनकारी’ का लोकार्पण हुआ। कार्यक्रम अध्यक्ष सुप्रसिद्ध साहित्यकार सुभाष चंदर रहे, साथ में साहित्यकार डॉ. अमरनाथ ‘अमर’ व मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ विशिष्ट अतिथि रहे।
आयोजन में भावना शर्मा के यू टयूब चैनल आरम्भव का लोकार्पण हुआ। अतिथियों का शब्द स्वागत भावना शर्मा ने किया।
साहित्यग्राम के जून 2026 अंक का लोकार्पण सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार मंगल नसीम की मौजूदगी में हुआ।
आरम्भव से डॉ. कविता मल्होत्रा, डॉ. रामेश्वरी ‘नादान’, सुश्री रुचिका शर्मा, सुश्री ज्योति द्विवेदी, सुश्री अर्चना को आरम्भव उज्जयिनी सम्मान से सम्मानित किया गया।
सुभाष चंदर ने संबोधित करते हुए कहा कि ‘कहानियों में शिल्प और तथ्य के संतुलन से ही बात बनती है और यह बात हर कहानीकार को समझनी चाहिए कि हमें पाठक के लिए कहानी लिखनी है, किताबों के लिए नहीं।’ उन्होंने यह भी कहा कि ‘मैंने भावना के कच्चेपन की कहानियों से आज तक का सफ़र देखा है, जो परिपक्वता आज नज़र आ रही है वह वर्षों की साधना का प्रतिफल है।’
डॉ. अमरनाथ ‘अमर’ ने कहा कि ‘कहानियाँ जीवन होती हैं, और जीवन के विविध पक्षों का चित्रण होती हैं, भावना जी की कहानियाँ भी जीवन का मधुर गीत हैं।’
डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने बुनकारी पर बात करते हुए कहा कि ‘बुनकारी की 11 कहानियाँ संवेदनाओं और सजगता के साथ समय को साधती हुई कहानियाँ हैं, आज के ज़ेन ज़ी पाठकों से लेकर हर वर्ग को बाँध कर रखने का सामर्थ्य है इन कहानियों में। इसके साथ हर कहानियों के अंत से एक नई कहानी का जन्म दिखाई देता है, यह प्रायः हर कथाकार के लिए संभव नहीं होता।’
उन्होंने भावना के सफ़र पर भी बात करते हुए यह भी कहा कि ‘भाषाई आंदोलन में भावना जी की तटस्थता और सक्रियता के साथ जिजीविषा भी प्रेरक है।’
ग़ज़लकार मंगल नसीम ने संबोधित करते हुए कहा कि ‘अक्षर व्यक्ति को ज़िंदा रखता है और आज अक्षरों की साधना का उत्सव है।’
साहित्यकार डी के शर्मा ने भावना शर्मा के विविध पक्षों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में चित्रा मुद्गल जी के संदेश का वाचन हुआ एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा भावना शर्मा का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम का संचालन कामना शर्मा ने किया व आभार वंदना शर्मा ने माना।
इस मौके पर भावना शर्मा की माँ श्रीमती उर्मिला शर्मा मौजूद रहीं, साथ में सुषमा सिंह, अनिल मीत, ओमप्रकाश प्रजापति, अपूर्व झा, शिखा जैन, सुरभि सप्रू, अंजली वैद, भागीरथ सिन्हा, नीलिमा शर्मा, शिव कुमार, राजेश, मोनिका, महक, बाल कीर्ति, मनीष इत्यादि साहित्यकार मौजूद रहे।
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