स्वदेश प्रेम /दिल्ली
शान मोहम्मद सिद्दीकी
नई दिल्ली। युवा वकील एवं सामाजिक कार्यकर्ता निशांत चौधरी और उनके परिवार पर हुए हमले के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है। बीती 6 फरवरी को शाहदरा जिले के फर्श बाजार थाना क्षेत्र में कोर्ट परिसर के भीतर चार ज्ञात व 50 अज्ञात हमलावरों ने उन पर चाकू से हमला किया। इस वारदात के CCTV फुटेज पुलिस को मिल चुके हैं, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे चौधरी समर्थकों में आक्रोश है।
हमले के विरोध में निशांत चौधरी ने 18 फरवरी को गृह मंत्री आवास के सामने धरना प्रदर्शन करने की घोषणा की है। इसके मद्देनजर प्रशासन ने गृह मंत्री आवास के आसपास धारा 144 लागू कर दी है।
“हम बदला नहीं, बदलाव चाहते हैं” – निशांत चौधरी
हमले के बाद निशांत चौधरी ने बयान जारी करते हुए कहा,
“यह हमला केवल मुझ पर नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था और कानून के संरक्षकों पर है। ये गिने-चुने गुंडे हैं, जिनका काम कोर्ट-कचहरी में भय का माहौल बनाना है। परिवार पर हमला कर इन्होंने शिष्टाचार की सभी मर्यादाएं लांघी हैं। हम बदला ले सकते हैं, लेकिन हम बदला नहीं, बदलाव चाहते हैं।”
लोकप्रियता बनी हमले की वजह?
सूत्रों के मुताबिक, निशांत चौधरी की युवाओं में बढ़ती लोकप्रियता इस हमले की मुख्य वजह हो सकती है। वह युवा आइकॉन के रूप में उभर रहे हैं, जो कुछ प्रभावशाली समूहों को रास नहीं आ रहा। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या सत्ता में पीढ़ी दर पीढ़ी बैठे लोग नए वकीलों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास कर रहे हैं?
देशभर से 150 संगठनों का समर्थन
इस हमले के विरोध में देशभर से 150 संगठनों ने समर्थन जताया है और 18 फरवरी को गृह मंत्री आवास के सामने बड़े प्रदर्शन की घोषणा की है। प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस अलर्ट पर है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस हमले के दोषियों पर क्या कार्रवाई करता है और निशांत चौधरी के समर्थन में उठ रही आवाज़ें किस दिशा में जाती हैं।
