दिल्ली

पसमांदा मुस्लिम समाज ने बाबा साहब की जयंती पर दिया सामाजिक न्याय का सशक्त संदेश दिल्ली में भव्य स्वागत के साथ निकली शोभा यात्रा, बाबा साहब के विचारों को अपनाने का आह्वान शिक्षा, समानता और संविधान के मूल्यों पर चलने के लिए समाज को किया जागरूक

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प्रधान संपादक :- शान मोहम्मद सिद्दीकी

नई दिल्ली। भारतीय संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर राजधानी दिल्ली में पसमांदा मुस्लिम समाज द्वारा एक भव्य और प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयोजित शोभा यात्रा का पसमांदा मुस्लिम समाज के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने फूलों की वर्षा कर, फूलमालाएं पहनाकर तथा शॉल ओढ़ाकर भव्य स्वागत और इस्तकबाल किया।

यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और संविधान की मूल भावना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करने का एक सशक्त माध्यम बना। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोगों की भागीदारी देखने को मिली, जिसमें युवाओं, बुजुर्गों और महिलाओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने बाबा साहब के संघर्षपूर्ण जीवन, उनके विचारों और समाज सुधार में उनके अमूल्य योगदान को याद करते हुए कहा कि आज भी समाज में शिक्षा, समानता और अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने की अत्यंत आवश्यकता है। बाबा साहब का प्रसिद्ध कथन — “शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो पिएगा वही दहाड़ेगा” — आज भी समाज को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

पसमांदा मुस्लिम समाज के पदाधिकारियों ने इस अवसर पर बताया कि संस्था लंबे समय से समाज के कमजोर, पिछड़े, मजदूर और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है। संगठन का मुख्य उद्देश्य समाज में भाईचारा, एकता और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करना है, ताकि हर व्यक्ति को बराबरी का अधिकार मिल सके।

दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद हुसैन मंसूरी ने अपने संबोधन में कहा कि पसमांदा मुस्लिम समाज बाबा साहब के सपनों को साकार करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और समानता नहीं पहुंचेगी, तब तक देश का समग्र विकास संभव नहीं है।

इस आयोजन के माध्यम से लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक होने, अपने संवैधानिक अधिकारों को समझने और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने का संदेश दिया गया। साथ ही युवाओं से विशेष अपील की गई कि वे बाबा साहब के विचारों को अपनाकर एक सशक्त, समतामूलक और जागरूक भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने एक स्वर में “जय भीम, जय भारत, जय पसमांदा” और “संविधान जिंदाबाद” के नारों के साथ सामाजिक न्याय और समानता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

रिपोर्ट: स्वदेश प्रेम, ब्यूरो
शान मोहम्मद सिद्दीकी

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