एनआरएलएम और वस्त्र मंत्रालय की पहल से 300 स्वयं सहायता समूह की महिलाएं लेंगी प्रशिक्षण, हुनर बनेगा सम्मानजनक आजीविका का आधार
स्वदेश प्रेम, रमजान अली। गोण्डा
गोण्डा। जनपद में महिला सशक्तिकरण को नई गति देते हुए जिला प्रशासन ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) द्वारा विकासखंड नवाबगंज की ग्राम पंचायत बहादुरा स्थित कंपोजिट विद्यालय में ग्राम चौपाल का आयोजन किया गया। इस दौरान वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से संचालित ‘अवधिका चिकनकारी’ परियोजना के तहत 300 स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को प्रशिक्षित कर स्वरोजगार से जोड़ने की योजना की शुरुआत की गई।
300 महिलाओं को मिलेगा हुनर, रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया अवसर
ग्राम चौपाल में बड़ी संख्या में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। अधिकारियों ने महिलाओं को अवधिका चिकनकारी परियोजना के तहत प्रशिक्षण, उत्पाद निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण, विपणन, बैंकिंग सहायता तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। बताया गया कि यह पहल महिलाओं को पारंपरिक हस्तशिल्प से जोड़ते हुए स्थायी रोजगार उपलब्ध कराएगी, जिससे उनकी आय बढ़ेगी और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
महिलाओं को समूह आधारित उद्यमिता, वित्तीय प्रबंधन, बचत, ऋण सुविधा और स्वरोजगार के विभिन्न आयामों की भी जानकारी दी गई, ताकि वे भविष्य में सफल उद्यमी के रूप में अपनी अलग पहचान बना सकें।
ग्रामीण महिलाओं को मिलेगा बाजार से जुड़ने का अवसर
कार्यक्रम में उपायुक्त स्वरोजगार जे.एन. राव, उपायुक्त उद्योग बाबूराम, लीड बैंक मैनेजर विनोद तिवारी, ग्राम प्रधान सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने महिलाओं को कौशल विकास एवं स्वरोजगार योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है, ताकि उनके उत्पाद स्थानीय ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक भी पहुंच सकें।
‘आत्मनिर्भर महिला, समृद्ध गांव’ की सोच को मिलेगा नया आयाम
जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने अपने संदेश में कहा कि महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। ग्राम स्तर पर आयोजित चौपालों के माध्यम से महिलाओं को विभिन्न योजनाओं, कौशल विकास कार्यक्रमों और रोजगार के अवसरों से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से संचालित यह पहल ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगी और उन्हें सम्मानजनक आजीविका प्रदान करेगी।
कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं ने प्रशिक्षण लेकर चिकनकारी के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने और आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया। यह पहल न केवल महिला सशक्तिकरण बल्कि ग्रामीण विकास और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम साबित होगी।
