March 6, 2026

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थाना सिविल लाइंस में अवैध गतिविधियों का अड्डा बनी अवैध पार्किंग, गौशाला की आड़ में चल रहा खेल

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svadesh prem / स्वदेश प्रेम 

सह – संपादक : ललिता देवी

दिल्ली। राजधानी में प्रशासन की लापरवाही और पुलिस की संदिग्ध भूमिका के कारण अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। थाना सिविल लाइंस क्षेत्र में गौशाला की आड़ में अवैध पार्किंग का कारोबार खुलेआम संचालित हो रहा है, लेकिन स्थानीय पुलिस और बीट अफसर चुप्पी साधे हुए हैं।

गौशाला के नाम पर अवैध पार्किंग का गोरखधंधा

दिल्ली के बेला रोड, नजदीक मोनेस्ट्री, दिल्ली-54 पर स्थित “श्री श्याम गौशाला” के नाम पर अवैध पार्किंग चलाई जा रही है। यहां पर आने-जाने वाले लोगों से 30 से 100 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है, जिसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है। यह पार्किंग बिना किसी वैध अनुमति के संचालित हो रही है, लेकिन प्रशासन और थाना सिविल लाइंस इस पर कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि थाना सिविल लाइंस पुलिस और बीट अफसरों की मिलीभगत से यह अवैध पार्किंग फल-फूल रही है। यदि पुलिस चाहती, तो इसे बंद कर सकती थी, लेकिन महीनों से यह अवैध धंधा निर्बाध रूप से जारी है।

अवैध पार्किंग से ट्रैफिक और कानून व्यवस्था पर असर

इस अवैध पार्किंग के कारण सड़क पर ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ गई है और राहगीरों को आने-जाने में कठिनाई हो रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह पार्किंग गौशाला की आड़ में एक बड़ा अवैध धंधा बन चुकी है, जिससे सरकारी जमीन का गलत इस्तेमाल हो रहा है और जनता को परेशानी उठानी पड़ रही है।

प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि थाना सिविल लाइंस पुलिस और स्थानीय बीट अफसरों की इस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या वे इस पूरे गोरखधंधे से अनजान हैं, या फिर अवैध पार्किंग माफियाओं से सांठगांठ के कारण चुप्पी साध रखी है?

स्थानीय लोगों में आक्रोश, कार्रवाई की मांग

क्षेत्र के नागरिकों ने इस अवैध पार्किंग के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने मांग की है कि दिल्ली नगर निगम (MCD), ट्रैफिक पुलिस और दिल्ली पुलिस इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराए और इस अवैध पार्किंग को तुरंत बंद कराए।

क्या होगी ठोस कार्रवाई?

अब देखना होगा कि प्रशासन और पुलिस इस अवैध गतिविधि पर कोई कदम उठाते हैं या फिर यह गोरखधंधा जारी रहेगा। यदि जल्द कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो स्थानीय लोग बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।

अगर पुलिस और प्रशासन का रवैया यही रहा, तो यह साफ हो जाएगा कि अवैध पार्किंग माफिया को सरकारी संरक्षण प्राप्त है, और पुलिस तथा प्रशासन के नाक के नीचे अपराध फल-फूल रहा है।

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