स्वदेश प्रेम/दिल्ली
शान मोहम्मद सिद्दीकी
उत्तर-पूर्व जिला पुलिस ने एक बड़ी सफलता प्राप्त करते हुए साइबर अपराधी को गिरफ्तार किया और एक धोखाधड़ी के मामले को सुलझा लिया, जिसमें 1.3 लाख रुपये की ठगी की गई थी। यह ठगी पीड़ित से उसके रिश्तेदार (भांजे) के नाम पर की गई।
मामले का विवरण:
यह मामला तब सामने आया जब भजनपुरा निवासी अंकित वशिष्ठ के पिता के साथ 26 नवंबर 2024 को एक व्हाट्सएप कॉल के जरिए धोखाधड़ी की गई। कॉल करने वाले ने खुद को पीड़ित का भांजा बताकर पैसे की तत्काल आवश्यकता का बहाना बनाया। उसने कहा कि तकनीकी समस्या के कारण वह राशि ट्रांसफर नहीं कर पा रहा है और पीड़ित से 5-6 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करने का अनुरोध किया। विश्वास दिलाने के लिए आरोपी ने एक फर्जी डिपॉजिट रसीद भी भेजी, लेकिन सत्यापन पर पता चला कि कोई राशि ट्रांसफर नहीं की गई थी।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई:
शिकायत मिलने पर साइबर थाना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। इंस्पेक्टर विजय कुमार के नेतृत्व में एसआई मोहित कुमार, कांस्टेबल कपिल शर्मा और कांस्टेबल अभिषेक की टीम ने एसीपी विवेक त्यागी के मार्गदर्शन में जांच शुरू की।
डेटा विश्लेषण और गहन जांच के बाद पुलिस ने आरोपी की पहचान बाबलू कुमार महतो (24 वर्ष) के रूप में की। उसे नोएडा के मामूरा क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपी के पास से 5 स्मार्टफोन, 32 सिम कार्ड, 8 एटीएम कार्ड, 1 चेकबुक, 2 बैंक पासबुक और फर्जी आधार कार्ड बरामद किया। पूछताछ के दौरान बाबलू ने अपराध स्वीकार कर लिया और यह भी खुलासा किया कि वह इसी तरह के अन्य मामलों में पहले से शामिल रहा है।
साइबर अपराध का बढ़ता खतरा:
आज के डिजिटल युग में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है। धोखेबाज नए-नए तरीकों से लोगों को जाल में फंसाकर उनकी मेहनत की कमाई हड़प रहे हैं। यह घटना न केवल डिजिटल सुरक्षा की आवश्यकता को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि हमें सतर्क और जागरूक रहना होगा।
पुलिस की सलाह:
•अनजान कॉल्स और संदेशों पर भरोसा न करें।
•किसी भी वित्तीय लेन-देन से पहले सत्यापन जरूर करें।
•व्यक्तिगत जानकारी या बैंक डिटेल किसी के साथ साझा न करें।
निष्कर्ष:
साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस की यह त्वरित और सटीक कार्रवाई सराहनीय है। इससे हमें यह सीखने की जरूरत है कि सतर्कता ही सुरक्षा है। अगर हम सचेत रहेंगे तो ऐसे अपराधियों को अपने मंसूबों में कामयाब होने से रोक सकते हैं।
